- बेतिया/लौरिया(चौथी वाणी)
ऐतिहासिक अशोक स्तंभ को देखने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पर्यटक पश्चिम चंपारण के लौरिया पहुंचते हैं, उसी विश्व धरोहर के मुख्य प्रवेश मार्ग पर आज कचरे का अंबार प्रशासनिक लापरवाही की गवाही दे रहा है। अशोक स्तंभ और रामजानकी मंदिर के सामने सड़क के दोनों किनारों पर खुलेआम कचरा फेंका जा रहा है। तेज दुर्गंध के कारण राहगीरों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को नाक ढंककर गुजरना पड़ रहा है। यह मार्ग लौरिया से नरकटियागंज को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क पथ भी है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है।
हैरानी की बात यह है कि यह समस्या नई नहीं है। करीब एक वर्ष पहले कांग्रेस के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने तत्कालीन बीडीओ संजीव कुमार को लिखित आवेदन देकर यहां से कचरा हटाने और स्थायी डंपिंग यार्ड बनाने की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। इसके बाद वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी दिनेश पुरी ने भी अपनी पहली बैठक में इस मार्ग पर कचरा डंपिंग बंद कराने का भरोसा दिया, लेकिन आज भी हालात बदतर बने हुए हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मिथलेश सिंह, सुरेश कुशवाहा, धर्मेंद्र कुमार, विशाल कुमार और संजीत कुमार ने कहा कि जब विश्व धरोहर के सामने ही स्वच्छता की यह स्थिति है, तो नगर की व्यवस्था का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उनका कहना है कि लौरिया प्रखंड की अधिकांश पंचायतों में डंपिंग यार्ड बन चुके हैं, जहां कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और खाद निर्माण हो रहा है, लेकिन नगर पंचायत अब तक ऐसी व्यवस्था से वंचित है।
कार्यपालक पदाधिकारी दिनेश पुरी ने बताया कि कचरा निस्तारण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। एक-दो दिनों में जमीन मिलते ही डंपिंग यार्ड और कचरा निस्तारण भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा। अब सवाल यह है कि विश्व धरोहर की गरिमा बचाने के लिए प्रशासन के आश्वासन पहले जमीन पर उतरते हैं या फिर पर्यटकों को इसी बदबू के बीच लौरिया की पहचान देखनी पड़ेगी।